लघु कथा-2

                    बुरा ज़माना
   महेश के घर में उत्सव जैसा माहौल था। घर के सभी सदस्यों के चेहरों पर प्रसन्नता व उल्लास साफ झलक रहा था। घर में कुछ खास मेहमान भी आए हुए थे। महेश ने अपनी सारी बिरादरी व गाँव के अपने चेहतों को भी आमंत्रित कर रखा था। उनके पड़ोसी गोपाल की बुआ लक्ष्मी आज वर्षों बाद मायके आई थी।चूंकि महेश का घर रास्ते में पड़ता था, वह गली से गुजर रही थी तो महेश के पिता ने उसे आवाज लगाकर अपने घर बुला लिया। उससे मन ही मन सोचा कि शायद किसी की शादी है। फिर उसे ध्यान आया कि इस घर में तो शादी लायक कोई लड़का या लड़की है ही नहीं। वह इस धूम-धड़ाके का कारण जानने के लिए बेचैन हो उठी।
   इसी बीच किसी ने उसको बताया कि यह सब धूम-धड़ाका महेश के घर में पैदा हुई लड़की की 'छठी' का है। यह सुनकर किसी से बात किए बिना वह बड़बड़ा रही थी, क्या बुरा ज़माना आ गया है। लड़की के जन्म पर भी कहीं इतना इतराते हैं।

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